Programming kya hai?(what is programming in hindi?)

नमस्कार दोस्तों! आप सभी का हमारे ब्लॉग में स्वागत है।आज हम बेहद ही महत्त्वपूर्ण विषय के बारे में जानने वाले हैं।आज में आपको programming और programming languages के बारे में ज्ञान देेंनेवला हूं।
 programming kya hai
Programming


 क्या आप भी जाणना चाहते हैं, programming kya hai? शायद आपने इस्के बारे में जरूर सुना होगा. अगर आप computer और computer related knowledge में रूची रखतें हैं  तो आपके लिए programming kya hai   जानना बेहद ही जरूरी है।


क्योंकि programming करके ही हम सभी कार्य computer से  करवाते हैं। ऎसा समझो कि programming एक computer से काम करवाने का जरिया है, जो की हम programming languages के मदद से करते हैं।

programming जानने से पहले हमें programming languages के बारे में जानना चाहिए। क्योंकि programming languages से ही programming उत्पन्न होती हैं.

Programming languages kya hai और यह कितनी  प्रकार की होती है:

कई हजार सालों से मनुष्य आपस में बातचीत करने के लिए या अपनी भावनाओं को स्पष्ट करने के लिए भाषा language का इस्तेमाल करता आ रहा है। जैसे हमें किसि से बात करनी होती है या कुछ चाहिए होता है तो हम उसे  अपनी भाषा में बोलके बताते है। 

वैसे ही कंप्यूटर में communication के लिए programming languages का इस्तेमाल किया जाता है। 

जैसे मनुष्य भाषा को सुनकर communication करता है। एक-दूसरे से अपनी भाषा में विचार प्रधान करता है। लेकिन computer तो निर्जीव है। उस तक हम अपनी instructions को कैसे पहुंचाइए?

कंप्यूटर तक हम अपनी instructions प्रोग्राम के जरिए  पहुंचाते हैं। उस program को बनाने के लिए हम programming languages  का इस्तमाल करते हैं।
प्रोग्रामिंग भाषाओं का मुख्य उद्देश्य मशीन के प्रदर्शन को नियंत्रित करना और algorithm को व्यक्त करना होता है।

Programming languages kya hai

यह अब आपको बेहतर समझा होगा। 
अब हम programming languages के प्रकारों के बारे में सविस्तर जानते हैं।

programming languages के प्रकार:

Types of programming languages
Types of programming languages

आम तौर पर (basically) programming languages का दो पार्ट में विभाजन किया गया है:
  1. Low level languages
  2. High level languages

Low level languages (LLL):

Low level languages वो होती है जिन्हें कंप्यूटर द्वारा बड़ी आसानी से समझा जाता है। ये languages computer के करीबी होती है। लेकिन इंसानों के लिए इन लैंग्वेजेस को समजना बेहद ही मुश्किल होता है। क्यों कि इन languages को binary code में लिखा जाता है। मतलब इनमें जो code लिखे जाते है वो सिर्फ 0 और 1 का इस्तमाल करके लिखे जाते है। इसलिए इन्हें binary language भी कहा जाता हैं।

आपको Low level languages अच्छी तरह से समझ आई होंगी, अब चलिए उनके प्रकारों के बारे में जानते हैं।

Low level languages भी दो प्रकार की होती है:
  1. Machine languages
  2. Assembly languages

Machine languages:

Machine languages सभी तरह के मशीनों के बेहद निकट होती है। क्योंकी इन लैंग्वेजेस को मशीनों द्वारा बड़ी आसानी से समझा जाता है। इनमें code 0 और 1 का इस्तमाल करके बनाया जाता है। इन languages को अन्य भाषाओं में translate करनेकी जरूरत नहीं होती है, क्योंकि इन languages को मशीनों द्वारा बड़ी असानिसे execute किया जाता हैं।

Machine languages इंसानों को समजने के लिए बेहद ही मुश्किल होती हैं। क्योंकि इनको समजने के लिए बहुत सारे binary code को समजना पड़ता है और उन्हें याद करना पड़ता हैं। और यह करना सामान्य इंसान के लिए असंभव है।
इसलिए Machine languages का समावेश Low level languages में किया जाता हैं।

Assembly languages:

Machine languages को और आसान करने के लिए Assembly languages का निर्माण किया गया है। यह लैंग्वेजेस भी Low level languages ही हैं। बस यहां पे binary code के जगह कुछ pnunomic abbreviations(जैसे sum, add, div, etc) का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इन लैंग्वेजेस को मनुष्य द्वारा समजा जा सकता है।

इन languages को कंप्यूटर और मशीनों द्वारा execute करने के लिए उन्हें machine languages में convert किया जाता हैं। इसे convert करनेके लिए जिस software या tool का इस्तेमाल किया जाता है, उसे asembler कहते है।
जादातर इन languages को microprocessor बनाने के लिए इसतेमाल किया जाता हैं।

तो अपने Low level languages और उनके प्रकारों के बारे में (machine languages and assembly languages) विस्तारित जानकारी प्राप्त कर ली।अब हम जानते है कि High level languages kya hai और यह कैसे काम करती है।

High level languages(HLL):

High level languages(HLL) यह human readable languages होती हैं। इनमें code English
language का इस्तमाल करके लिखा जाता हैं। इन languages का Syntax, English से काफी मिलता जुलता होता है। इसलिए इन्हें मनुष्य आसानी से पढ़ सकता है और समज सकता है।

Java, python, C++ जैसी कुछ HLL काफी popular है। यह लैंग्वेजेस web designing से game development तक सभी जगह use की जाती है।

Computer और machines इन High level languages समज नहीं पाते। इसलिए इनका HLL to machine language(binary language) में convert किया जाता हैं।

HLL को Binary code में convert करने के लिए हम compiler और interpreter इन दो tools का इस्तमाल करते।

Compiler और interpreter में क्या अंतर है?(what is difference between compiler and interpreter)

Compiler प्रोग्राम के पूरे source code को पहले machine language में convert करता है और बाद में उसे execute करता है।

लेकिन interpreter का कार्य compiler से अलग है। Interpreter प्रोग्राम के source code को line by line machine language में convert करता है और line by line execute करता है।
Programming languages के बारे में हमने जानकारी प्राप्त कर ली। अब हम सविस्तर जानते हैं program  क्या हैं।

Program kya hai?

चलिए अब हम जानते है की Program kya hai.
Program is a set of instructions which are given to the computer to perform a specific task

"Program एक सूचना का संच होता हैं, जीसके जरिये हम कॉम्प्युटर से काम करवाते हैं."

Program एक programmer के द्वारा programming language मे बानाया जाता हैं. यह program एक human readable source code होता हैं. मतलब इसे मानव पढ सकता हैं.

Program को हम प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस के जरिए लिखते है और computer को कोई काम करने के लिए सुचना देते है।
यह प्रोग्राम execute होने के बाद हमें स्क्रीन पर output मिलता है।

Types of program (program के प्रकार):

चलिए अब हम  program के प्रकार के बारे में सविस्तर जानकारी प्राप्त करते हैं।

Program के मुख्य दो प्रकार होते हैं.
  • Application program
  • System program

Application program kya hai?

Application programs ये ऐसे programs होते हैं जिणका इस्तमाल करके युजर्स आपना काम आसन तरीके से कर सकते हैं. जैसे हर्दिन हम लोग whatsapp, facebook पे अपने दोस्तों के साथ,रिस्तेदारोऺ के साथ बाते करते है. facebook, whatsapp भी application programs ही हैं।

Application programs को application softwares भी काहा जाता है.

हम हरदिन बोहत सारे application programs इस्तामाल करते रहते है,जैसे email, calculator, calendar,games, social networks, wordpress,आदी

Application programs के उदाहरण
  • Email
  • Web browser
  • Media players
  • Games
  • Calculator
  • Facebook
  • Whatsapp
  • Alarm clock
उपर दिये गये सभी application programs हमारे मोबाईल, लॅपटॉप मे हम इस्तमाल करते रहते हैं.
यह सभी programs युजर्स को applications प्रधान करते है, इसलिये इन्हे application programs कहा जाता है.अब आपको Application program क्या होते हैं? अच्छी तरह से समझ आया होगा। तो चलिए अब हम program के अगले प्रकार की तरफ बढ़ते हैं।

System program kya hai?

System programs हार्डवेअर और सॉफ्टवेअर को एक साथ काम करने में मदत करते हैं.systeam programs युजर्स इंटर्फेस और सिस्टीम कॉल्स के बीच में स्थित होते हैं.
यह कॉम्प्युटर की इंटर्नल सिस्टीम को manage करने का काम करते है.

System programs के उदाहरण:

  • Operating systems
  • Networking systems
  • Website server
  • Data servers

System programs के प्रकार: 

System programs नीचे दिये गये पांच प्रकार के होते हैं.

Status information:

यह systeam program युजर्स को systeam की current and past status की जाणकारी देता है. इनमे system date, system time, disc space, available system memory आदी जाणकारी का समावेश होता हैं.

Communication programs:

यह प्रोग्राम system communication के लिये जरूरी होते हैं.यह वेब ब्राउजर से communicate करके नेटवर्क से अपेक्षित जाणकारी प्राप्त करते हैं. यह कॉम्प्युटर की communication system कहलाती हैं.

File manipulation:

यह program सिस्टिम फाईल्स को manipulate करणेका काम करता हैं. यह प्रोग्राम विविध commands के जरिये सफल होता हैं, जैसे delete, create, copy, rename, print इत्यादी. Commands के जरिये फाईल्स को create करना, delete करना, किसी text को दुसरी फाईल्स मे copy करना आदी काम करता हैं.

Program loading and execution:

कोई भी प्रोग्राम execute होणे के लिये वह पाहिले कॉम्प्युटर मेमोरी मे लोड होना जरूरी होता है. यह system प्रोग्राम को कॉम्प्युटर मेमोरी मे लोड करके उन्हे execute करनेका महत्वपूर्ण काम करता हैं. इस्कीलिये इस्मे loader और executeर काा समावेश होता हैं.  

File modification:

यह program फाईल को change और modify करने का काम करता हैं. इस्ने text को add करना, delete करना आदी काम का समावेश होता है. Text editors इस्का उदाहरण हैं.

आज हमने क्या सीखा:
आज हमने programming languages के बारे में जानकारी प्राप्त की। Programming क्या होती है? समज लिया। Program क्या है, program के प्रकार जान लिए। आशा करता हूं कि आपको यह जानकारी मददगार साबित होंगी। आपको यह जानकारी कैसी लगी comment करके जरूर बताइए।

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